भारत मे आक्रांताओ का आगमन

भारत प्राचिन काल मे सोने की चिडियाँ के नाम से विख्यात था। यहा बहुत महान शासको ने वर्षो शासन किया। देश मे अन्न,धन की कोई कमी नही थी। कुछ छोटे शासक आपसी मनमुटाव रखते थे पर द्रोह के भाव नही रखते थे। उधर दुसरी दुनिया यानि विदेशो मे मारा.काटी लुटपाट चलती रहती थी। ऐसे समय मे एलेक्सजेंडर पुरी दुनिया पर शासन करने के भाव लिए दुनिया मे लुट-पाट करता हुआ भारत पर भी अपना अधिकार करना चाहता था तो उसने भारत पर भी आक्रमण कर दिया।

भारत पहुचते-पहुचते उसकी सैना युद्ध करने से मना करने लगी इसका एक कारण भारत के महान यौद्धा भी थे जिनका सामना करना उसकी सैना को भारी पड रहा था। एलेक्सजैंडर को हार कर युद्ध रोक कर वापस जाना पडा पर उसने अपने दूतो को भारत मे छोड दिया और अपने बेटी हेलन का विवाह चंद्रगुप्त से करवा कर चंद्रगुप्त को अपना जीता हुआ राज्य सौप दिया था। यहाँ तक तो ठिक की आक्रमण हुआ अपना राज्य पुनः हाथ आ गया। इसके बाद भारत मे शांति रही।

ऐसे मे कई वंशो ने राज्य किया। मौर्य शासक,कुषाण शासक,वर्धन शासक, फिर गुप्त शासक यानि गुप्त काल के महान शासको ने कई सालो तक एकछत्र शासन किया। गुप्त काल भारत का स्वर्ण युग कहलाया। इस काल मे सभी क्षेत्रो मे विकास हुआ। भारत को पंचाग मिला,ज्ञान-विज्ञान के नये अविष्कार हुए, व्याकरण का ज्ञान मिला, खगोल जगत मे भी खोजे हुई। भारत को नया शंवत जिसे विक्रम शंवत कहते है मिला। ज्योतिष व वास्तु की गहराईयो को खोजा गया। गुप्त काल के कई महान शासक जिनको हम आज भी याद करते है। चंदर्गुप्त विक्रमादित्य,राजा भोज, राजा हरिशचंद्र आदि इनके समय मे चहुमुखी विकास हुआ।

उस समय के भव्य भवन निर्माण आज भी हमे अपनी छटा से आकर्षित करते है। भव्य कलाकृतिया,मानवकद की विशाल मुर्तिया जिसे पत्थर पर निर्मित किया गया है। गुप्तकालिन कलाकृतियो के अबशेष भारत मे कई जगह पडे है मथुरा मे तो पुरा संग्राहालय बना हुआ है। ग्यारवी शदी ( 11 वी शदी ) आते आते गुप्त काल समाप्त हो गया। ऐसी स्थिति मे लुटेरो को लुट-पाट मचाने का मौका मिल गया क्योकि अब भारत आपसी फुटी के कारण कमजोर हो चला था। छोटे-छोटे राज्य बन गये थे। जो आपस मे ही प्रतिस्पर्धा करते रहते थे। उधर अफगान,तुर्क आदि जगहो से लुटेरे धन की लालसा से भारत पर नजर रखने लगे थे। भारत मे एकछत्र शासक नही है इसकी भनक उन लुटेरो को लगी तो उन्होने अपने जासूस (गुप्चर ) भारत भेजे।

वह गुप्तचर भारत मे भारतीय लिवास मे छुप कर रहते धिरे-धिरे वह जनता के करीब जाने लगे ।भारतीय सैनिको की वेशभूषा मे होते तो लोग उन्हें अपना बंदा समझते। अब वे जनता से बातो-बातो मे राज ऊगलवाने लगे, जैसे राज्य का धन कहाँ पडा है, शासको की कमजोरी क्या है। छुप कर सारा भीतरी भेद इकठा करते और अपने आका उन लुटेरो को वह भेद पहुचाते। इस बात की पुष्टि मीराबाई के दादाजी राव दूदा और राणा सांगा की टिम के एक शासक के गुप्चर विभाग को देश मे छिपे बैठे लुटेरा टिम के जासूस की खबर लगी उन्होन् उस जासूस की खबर शासक राजा जी को बताई शायद मे उन शासक का नाम भुल रही हुँ पर बात पुख्ता है।

अब राव दूदा के संघ के उन शासक राजा ने उन जासूसो को पकड लिया वे दो थे ,उन्होने अपना भेद नही बताया,उनमे से एक का नाम मुईनुद्दीन था।उन्हे कैदखाने मे कुछ दिन रखा फिर रहम खा कर वापस अपने देश लौट जाने के लिए उन्होने उसे अपनी सीमा से बाहर कर दिया। यही उन शासको की भुल थी कि उनको छोड दिया जब्कि उनको खत्म करना चाहिए था दया भी सोच समझ कर करनी चाहिए। अब कुछ समय बाद वह वापस भारत लौट आए पर अब की बार उन्होने पक्की योजना बना रखी थी कि कही पकडे गए तो बच कर भाग निकले।

इस लिए उन्होने नगर के बाहर कुछ दूरी पर अपना डेरा डाला अब वह धर्म गुरु बन कर आए थे उन्हे इतना तो पता चल ही गया था कि भारत मे धर्म के नाम पर शक नही होता यहाँ संतो का आना जाना लगा रहता है उन पर कोई जांच नही होती बस बन गए वे संत-फकीर बैठ गए धुनी रमा कर और मौका मिलते ही छुप कर जनता मे जाते और राज्य मे घटने वाली हर घटना को सुनते। संत फकीर भेश होने पर कोई शक भी नही करता था। उन जासूसो ने नगर से बहुत दूर तक अफगान जाने के लिए एक सुरंग खोल ली थी उसी सुरंग से वह अपने आकाओ तक समाचार पहुचाने का काम लेते थे।

सुरंग के रास्ते से वह अफगान के लिए निकला करते थे। सुरंग पर भारी पत्थर रख कर उसे छुपा दिया जाता था। अब उनकी हरक्कतो को देख गुप्तचर विभाग को शक होने लगा और उन जासूसो को पकड लिया गया। इस तरह राजा ने उसे वापस भारत लौट कर आने और जासूसी करने की सजा मे मौत की सजा दी। सैनिको ने उन जासूसो का कत्ल कर दिया। ऊधर लुटेरो को भारत की अतुल सम्पदा का राज मिलने लगा तो अब और भी जासूस भारत मे भेजे गये जो बहुत होशियारी से जासूसी करते। लुटेरो ने मौका पा कर भारत पर आक्रमण कर दिया। उन्हे बहुत बार सीमा से ही खदेडा गया। लुटेरो को भारत से खदेडने के लिए महाराणा सांगा ने छोटी-बडी कई रियास्तो के शासको को अपनी टिम मे मिलाया।

इस टिम मे मीराबाई के दादा राव दूदा और पिता राव रत्नसिंह भी सामिल हुए थे। लुटेरो को भारत आने से रोका जाने लगा। उस समय के लुटेरे अलाऊद्दीन खिलजी,मौहम्मद गौरी थे। इस तरह भारत मे लुटेरे धन लुट कर ले जाते। भारत की जनता ईश्वर से डरती थी। इस लिए राजा सारा खजाना मंदिरो मे तहखाने बना कर वहाँ रखते थे। इन लुटेरो ने धन की लालसा से मंदिरो को नष्ट करना शुरु किया। जब बाबर भारत आया तो उसने भारत पर राज करने की नियत से वहाँ राजाओ से युद्ध कर राज्य प्राप्त करने लगा।

भारत के महान शुरवीर यौद्धा शासक होते हुए भी बाबर से हारते क्यो थे यह बात आपके दिमाग मे आती होगी। भारत मे शूरवीर यौद्धा तो थे पर भारत आधुनिक हथगोलो, तौपो आदि से अनभिग्य थे। दुसरा भारत के शासक हाथी पर सवार हो कर युद्ध करते थे। उधर विदेशी तुर्क के तेजतरार घोडो पर आते थे। जब हाथी घायल हो कर गिरता तो अपनी सैना को संग ले डूबता था। बमगोलो से मिनटो मे सैनिक टुकडी नष्ट हो जाती पैदल सैनिक गोलो का सामना कैसे करते।

एक बार बाबर की सैना भी भारत के राजाओ का शौर्य देख घबरा गई, मगर बाबर ने उन्हे भाषण दे कर पुनः तैयार कर लिया। बाबर ने कहाँ अगर यहाँ से खाली हाथ लौट गए तो नरक जाना पडेगा और जीत गये तो हम सब को स्वर्ग मिलेगा। उसके साथी सैना अगले दिन दुगुनी होशियारी से युद्ध कर आ गई। बाबर शासक बना उसके मरने पर उसके बैटे हुमायु और उसके तीन और भाई भारत पर राज करने लगे हुमायु की मृत्यु के बाद 13 वर्ष का अकबर संरक्षक बेरामखाँ की देखरेख मे शासक बना।

बेरामखा कटर धर्म अनुयायी था उसने अकबर से मंदिरो को नष्ट करवाया वहाँ मंस्जिदे स्थापित की जिसमे से एक बाबरी मंस्जिद जो कि राम मंदिर तौड स्थापित की गई थी। अकबर के राज्य पाते ही उसने कई दरगाह भी बनवाई थी। टुटे मंदिरो का दर्द आज भी हर भारतीय के दिल मे शूल बन कर चुभता है।

राम राम सा,

जय श्री राम

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