मिट्टी मे दफन हिरा कदर तेरी कौन समझ पाया ( काव्य रचना )
मिट्टी मे दफन हिरा, कदर तेरी समझ पाया है कौन। दुनिया की बेरहम नजरो ने तुझे, पत्थर ही तो बतलाया … पढ़ना जारी रखें मिट्टी मे दफन हिरा कदर तेरी कौन समझ पाया ( काव्य रचना )
मिट्टी मे दफन हिरा, कदर तेरी समझ पाया है कौन। दुनिया की बेरहम नजरो ने तुझे, पत्थर ही तो बतलाया … पढ़ना जारी रखें मिट्टी मे दफन हिरा कदर तेरी कौन समझ पाया ( काव्य रचना )
कर ली बसर हमने जीन्दगी यूही हालात का फसाना बन कर। तमाम तमन्नाए सभी रह गई हकीकत बन कर। ब्यान … पढ़ना जारी रखें बसर कर ली जीन्दगी हमने (काव्य रचना )
भारतीय सभ्यता सबसे पुरानी सभ्यता है। हमारी सभ्यता के साथ पनपी पुरानी सभी सभ्यता लगभग खत्म हो गई मगर, हमारी … पढ़ना जारी रखें सभ्यता कल,आज,कल ( विचारणीय तथ्य )
( बेटे की नजर मे माँ का अस्तित्व ) मेरी प्यारी माँ,तुम होती हो तो रोशन होती मेरी जीन्दगी, मेरी … पढ़ना जारी रखें मेरी प्यारी माँ ( काव्य रचना )
हाँ हूँ मै अर्धांगिनी,तन से ही नही मन से आत्मा से जुडती हुँ मै।हाँ हुूँ मै अर्धांगिनी। माना कि हर … पढ़ना जारी रखें अर्धांगिनी (काव्य रचना )
मुझे छू कर गुजरने वाली ऐ हवा इतना तो बतला कि, किस साहिल पर है सनम का ठिकाना। है वनो … पढ़ना जारी रखें कहाॅ है सनम का ठिकाना (काव्य )
आपने बहुत से ऐसे लोगो को देखा होगा जो अपनी स्थिति,अपनी उमर, अपने वर्ग के भिन्न लोगो से प्रभावित होते … पढ़ना जारी रखें फैशन या मनोरोग
तन्हा बंजर सी मरु भूमी पर उग आई साख मेरी क्यो खोदते हो जडे मेरी। माटी के इस बूत मे … पढ़ना जारी रखें क्यो खोदते हो जडे मेरी
लौट चलो पथिक सुन नीड की चित्तकार। व्याकुल अधीर सा क्यो डोलता फिरे। मन बावले को टटोलता फिरे। व्यर्थ निहारता … पढ़ना जारी रखें लौट चलो पथिक सुन नीड की चित्तकार
गुम हुआ अक्श मेरा ना जाने कही। ढुंडती हुँ हर लम्हे को चारो तरफ बिखराए। खो जाती हुँ यादो के … पढ़ना जारी रखें खो गया है अक्श मेरा कही