वो चलाती गई और मै चलता गया ( काव्य रचना )

वो चलाती गई और मै चलता गया ( काव्य रचना )

वो ( जीन्दगी ) चलाती गई और मै चलता गया।अस्तित्व क्या है मेरा, ये बता पायेगा कौन भला। उन से … पढ़ना जारी रखें वो चलाती गई और मै चलता गया ( काव्य रचना )

कौन हुँ मै हस्ति क्या मेरी  साँवरे— ( काव्य रचना )

कौन हुँ मै हस्ति क्या मेरी साँवरे— ( काव्य रचना )

कौन हुँ मै हस्ति क्या है मेरी साँवरे जान ना पाये है। माट्टी का पुतला है, माट्टी मे ही मिल … पढ़ना जारी रखें कौन हुँ मै हस्ति क्या मेरी साँवरे— ( काव्य रचना )

भला है, अकेलापन मतलबी दुनिया मे बेगानो की भीड से कही

भला है, अकेलापन मतलबी दुनिया मे बेगानो की भीड से कही

भला है, अकेलापन मतलबी दुनिया की भीड से। लोग कहते है,हो तुम अकेले । हम भी मुस्कुरा देते है, कहाँ … पढ़ना जारी रखें भला है, अकेलापन मतलबी दुनिया मे बेगानो की भीड से कही

मिट्टी मे दफन हिरा कदर तेरी कौन समझ पाया  ( काव्य रचना )

मिट्टी मे दफन हिरा कदर तेरी कौन समझ पाया ( काव्य रचना )

मिट्टी मे दफन हिरा, कदर तेरी समझ पाया है कौन। दुनिया की बेरहम नजरो ने तुझे, पत्थर ही तो बतलाया … पढ़ना जारी रखें मिट्टी मे दफन हिरा कदर तेरी कौन समझ पाया ( काव्य रचना )