खुशियो के दो पल ( कहानी )

एक ऐसी कहानी जो कभी जीवन्त थी। कहानियाँ हमे बहुत सी सिख दे जाती है। चलिए इस कहानी का रुख करते है। कहानी के सभी पात्र व स्थान काल्पनिक है।

सत्यनदेव और रीना की शादी अचानक हुई क्योकि सत्यनदेव के लिए एक रिस्तेदार के यहाँ रिस्ता आ रहाँ था। सत्यनदेव उस लडकी जिसका नाम चंद्रिका था की तरफ झुकाब रखने लगा था, पर उसके परिवार के लोगो माता-पिता, बहनो को चंद्रिका को अपनी बहु बनाने मे खुशी नही हो रही थी। वह नही चाहते थे की सत्यन की शादी चंद्रिका से हो। इस लिए उन्होने गुप-चुप एक लडकी जिसका नाम रीना था अपनी बहु बनाने की ठानी अचानक सत्यन को फोन करके बुलावा भेजा। सत्यन घर आया तो वह उसे रीना के घर ले गए और रीना के संग सत्यन की सगाई के दस्तूर कर दिया। सत्यन कुछ समझ पाता इससे पहले दोनो की सगाई हो गई। 4-5 दिनो मे ही सत्यन की शादी रीना से हो गई।

अब सत्यन को पग-फैरे की रस्म के लिए रीना के संग उसके मायके जाना था पर सत्यन रीना के संग उसके मायके जाने से मना कर रहाँ था। सत्यन अपने परिवार को बहुत सम्मान देता था। इस कारण उसकी माँ और बहनो ने सत्यन को रीना के संग उसके मायके जाने के लिए राजी कर लिया। सत्यन मन ही मन चंद्रिका को अपनी जान मान बैठा था। उसे रीना मे कोई रुचि ना थी पर परिवार के दबाव मे रीना को अपनाया था। खास कारण यह भी था कि सत्यन चंद्रिका के मन की बात नही जानता था कि चंद्रिका भी उसे चाहती है या नही,इस लिए उसने रीना से विवाह करने के लिए दबी जबान मे विद्रोह कर रहाँ था पर मजबूरी मे रीना को अपना लिया।

पग-फैरे की रस्म के लिए सत्यन ने अपनी गाडी मे रीना को बैठाया और रीना के मायके के घर पर पहुच कर उसके मायके के दरवाजे तक पहुच कर रीना को कहाँ ठीक मेने तुम्हे तुम्हारे मायके छोड दिया अब मै वापस जा रहाँ हुँ। रीना को उसके घर के बाहर छोड सत्यन वापस लौट गया। रीना ने सत्यन की बडी बहन को फोन पर बताया कि सत्यन उसे उसके मायके के घर के बाहर ही छोड दिया था। रीना चाहती थी कि सत्यन अपने ससुराल मे आए सबसे मिले मुलाकात करे। रीना की बहन माता-पिता सत्यन से मिलने की ईच्छा रखते है.सत्यन को उसकी बडी बहन मोनिका ने समझा-बुझा कर रीना के मायके मे जा कर उसके परिवार वालो से मिलने की सलाह दी।

सत्यन बहन के कहने पर रीना को लेने उसके मायके गया। परिवार के दबाव मे आ कर सत्यन ने चंद्रिका को मन के किसी कोने मे छुपा कर रख लिया और रीना के संग अनईच्छा गृहस्थ शुरु किया। रीना गर्भ से हुई उसकी गौंद भराई पुरी रीति रिवाज से की गई। रीना ने एक कन्या को जन्म दिया। सत्यन ने अपनी लाडली को गौंद मे लेकर उसका नाम रख दिया। अब सत्यन रीना के करीब आने लगा। वह चंद्रिका की याद भी भुलने लगा था। सत्यन अपनी लाडली को बहुत प्यार करता था। वह अपनी लाडली अंशिका के जन्म के बाद रीना को दिल से अपना लिया था। अब रीना और सत्यन की गृहस्थी बहुत खुशहाल चलने लगी। दोनो की बातचित चहकने की आवाजे घर भर मे गुंजने लगी थी।

दो एक साल बाद सत्यन को पुत्र आयुष की प्राप्ति हुई अब तो सत्यन के पाव जमीन पर नही पडते। वह बहुत खुश रहने लगा ऐसा लगने लगा कि सत्यन ने चंद्रिका को कभी देखा भी नही हो। सत्यन रीना और अपनी दोनो संतानो के संग घुमने के लिए दुर-दराज जाते। अभी अंशिका मात्र 3-4 साल की ही हुई थी कि सत्यन की जीन्दगी मे भुचाल आ गया। रीना एक शिक्षिका थी वह अपने निवास से दो घण्टे का सफर तय करके अपनी नौकरी करने जाती थी। वह पहले घर का काम सलटा कर तैयार हो कर अपनी स्कूल जहाँ वह पढाने जाती थी वहाँ पहुचती। रीना का स्कूल शहर से थोडी दुर एक कस्बे मे था। वह रोज आना-जाना करती थी क्योकि उसे नौकरी के संग बच्चो व सास-ससुर की सेवा भी करनी होती थी।

सत्यन शादी से पहले शहरससे बहुत दुर दुसरे शहर मे नौकरी करता था। शादी के बाद परिवार वालो की सलाह पर सत्यन ने अपनी बदली अपने शहर मे करवा ली थी। वह अपनी नौकरी से छुट्टी मिलते ही घर लौट कर अपने बच्चो के संग समय व्यतित करता। एक दिन की बात सत्यन को प्रमोशन मिला वह बहुत खुश था। सत्यन अपनी खुशी रीना से बांटने के इरादे से अपने आँफिस से निकल कर रीना को लेने उसके स्कूल मे पहुच गया। स्कूल मे जाने पर पता चला कि रीना स्कूल से कई देर पहले ही निकल गई थी वह नोडल प्रभारी से मिलने गई यह जान कर वह नोडल प्रभारी के आँफिस पहुचा। नोडल प्रभारी के आँफिस मे रीना नही मिली। उसने आँफिस के कर्मचारी से पुछा की रीना यहाँ आई थी क्या वह घर लौट गई। आँफिस कर्मचारी ने बताया रीना नोडल प्रभारी के घर गई है।

सत्यन रीना को लेने नोडल प्रभारी के घर पहुचा। घर पर कोई नजर नही आया घर पर नौकर था उसने बताया साहब घर के भीतर है। सत्यन उसके घर के भीतर पहुचा उसे एक कमरे मे रीना और नोडल प्रभारी की आवाज सुनाई दी। वह तुरंत उस कमरे के नजदीक पहुचा कमरे मे नजर गई तो वह एक मूर्तिवत खडा रह गया। कमरे पर बिस्तर पर रीना और नोडल प्रभारी को संग देख हैरान परेशान हुआ. सत्यन पर रीना की नजर पडी वह तुरंत बिस्तर से उतरी और अपने आप को व्यवस्थित करने लगी। रीना तैयार हो तुरंत कमरे से बाहर आई वह कुछ घबरा रही थी कि सत्यन ने सब देख लिया। इस कारण सत्यन पता नही कैसा व्यवहार करेगा।

सत्यन ने चुप-चाप उस घर से बाहर निकल पडा रीना उसके पिछे निकल पडी और सत्यन के संग गाडी मे बैठ गई। सत्यन ने गाडी को चालु किया गाडी तेज रफ्तार से सडक पर दौडने लगी। सत्यन ने अपने घर के बाहर पहुच कर गाडी से उतर चुप-चाप घर मे चला गया। कमरे मे खुद को बंद कर लिया। रीना ने कमरे के दरवाजे को खटकाया पर सत्यन ने कमरा नही खोला। रीना अपने बच्चो के संग दुसरे कमरे मे सोने चली गई। सत्यन अगले दिन सुबह जल्दी ही बीना भोजन पानी किये चला गया। उसने अपने स्थानांतरण के लिए अपलाई कर दिया। वह अब अपने घर से बहुत दुर किसी दुसरे शहर मे चला गया। रीना भी अपनी नौकरी को पहले की ही भांति करती रही।

सत्यन अपने माता-पिता और बच्चो के लिए महिने मे एक-दो बार मिलने घर आता था। सत्यन घर तो आता पर रीना के संग एकांत नही बिताता। वह रीना से दुरी बना कर रखता। सत्यन की बडी बहन मोनिका ने सत्यन को बहुत समझाया कि वह अपना स्थानांतरण वापस अपने शहर मे करवा ले पर वह अब किसी की भी बात पर इस सलाह को नही मानता था। सत्यन ने अपनी पत्नि रीना से बदले के भाव से एक सहकर्मी से नजदीकी बना ली सत्यन बहुत समझदार था इस लिए जल्दी ही बदले के भाव से बाहर निकल गया। उसे अपनी गलती समझ आ गई इस लिए उस सहकर्मी से दुरी बना ली। इस तरह घर से दुर रह कर सत्यन अपनी जीन्दगी जीने लगा। घर जाता माता-पिता व बच्चो को मिल वापस नौकरी पर लौट आता।

धिरे-धिरे जीन्दगी गुजने लगी। सत्यन के माता-पिता का देहान्त हो गया। सत्यन के बच्चे भी बडे हो गए। अब सत्यन को अपने पुराने दिन याद आने लगे थे जब उसने चंद्रिका को देखा था वह कितनी सुन्दर,पवित्र थी। अब सत्यन को पछतावा होने लगा कि उसने शायद अपने परिवार के दबाव मे आ कर रीना से विवाह ना किया होता तो चंद्रिका उसकी पत्नि होती। चंद्रिका के संग अगर विवाह हो जाता तो वह एक खुशहाल जीवन बीता पाता। वह रात दिन चंद्रिका के बारे मे ही सोचता। एक दिन उसे चंद्रिका की एक सहेली मिली जिसने चंद्रिका की कहानी सत्यन को बताई। सत्यन मन ही मन यह सोचने लगा कि चंद्रिका को उसके पति ने अपनी गर्ल फ्रैंड के कारण छोड दिया था। चंद्रिका का पति एक अयाश था उसने चंद्रिका को बहुत यातनाए दी।

बेचारी चंद्रिका अपने जीवन को जी रही थी। सत्यन चंद्रिका को मिलने गया वहाँ जा कर उसने देखा कि चंद्रिका पहले जैसी सुन्दर ना रही थी वह दिन रात घर का सारा काम करने मे लगी रहती अपने बारे मे सोचने का वक्त उसके पास नही था। पति के अत्याचार सहती रहती थी एक दिन उसके पति ने उसे घर से निकाल दिया। सत्यन ने चंद्रिका की हालत देखी उसे बहुत दुख हुआ। अब सत्यन चंद्रिका के बारे मे सोच कर उसके परिचित से मिला और उसने चंद्रिका से अपनी शादी की बात उन से कही। चंद्रिका के परिचित ने सहमति दे दी।

सत्यन ने रीना से तलाक ले कर चंद्रिका से शादी कर ली। सत्यन गुमशुम रहता था पर चंद्रिका की सेवा से वह इतना प्रसन्न था कि उसने खुद को बदलना शुरु किया। वह अब चंद्रिका के संग हँसी मजाक करता, उसके संग घर के काम मे हाथ बटबाता। वह चंद्रिका के संग घुमने-फिरने भी जाता। सत्यन की जींदगी मे बहार आने लगी। अधेड उमर की शादी भी बहुत सकून देने लगी। सत्यन और चंद्रिका दोनो के जीवन मे खुशियाँ आ गई,वह साआनन्द जीवन गुजारने लगे।

जय श्री राम

http://चित्रा की कलम से

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