फैशन या मनोरोग

आपने बहुत से ऐसे लोगो को देखा होगा जो अपनी स्थिति,अपनी उमर, अपने वर्ग के भिन्न लोगो से प्रभावित होते है। उनके समान व्यवहार करना, उनके जैसे पहरावे मे रहना पसंद करते है।ऐसी सभी बाते उन लोगे को मनोविज्ञान की दृष्टि कोण से देखने पर वह केवल मनोरोगी ही सिद्ध होते है। आईए जाने कुछ ऐसे तथ्य जिनको देख हम पहचान सके अमूक इंसान किस मांसिक स्थिति का है।—

(1) बहुत सी लडकियो, महिलाए अपने परिधान को ना पहन कर जैसे सलवार-सूट,साडी,फ्राॅक,लहंगा आदि की जगह पैंट,लोवर, पायजामा,कैपरी आदि पहनती है। तो ऐसी महिलाओ को पुरुष बहुत पसंद होते है। पुरुषो से खुल कर हँसी-मजाक करना इनकी आदत का हिस्सा होता है। यह खुद भी अपने आपके को पुरुष के समान ही समझती है। इस लिए यह पुरुषो की तरह रहन-सहन पसंद करती है।कुल मिलाकर देखा जाए तो यह मनोरोग की शिकार होती है।

(2) कुछ पुरुष महिलाओ की भांति लम्बे बाल रखना,कानो मे छेदन करवा कर कोई गहना पहनना आदि बाते यह साबित करता है अमूक पुरुष अपने विपरित लींग के प्रति बेहद झुकाव रखता है। उसे महिलाओ की तरह रहना पसंद होता है। इस लिए यह भी एक मनोरोग की स्थिति बनती है।

(3) कुछ महिलाए पुरुषो के संग अधिक रहती है और कुछ पुरुष महिलाओ मे रहना बहुत पसंद करते है यह भी मनोरोग की स्थिति बनती है ऐसे लोग खुद को विपरित लींग के समान समझते है इसी लिए उनकी नजदिकियाँ इन्हे आरामतलब महसूस होती है। ऐसे लोग अपने विपरित लींग के लोग के साथ समय बिताते है।

(4) कुछ लोग शादी शुदा होकर भी अपने जीवन साथी को धोखा देकर अन्य से जैसे पुरुष पत्नि से अतिरिक्त अन्य महिलाओ के प्रति समर्पित रहता है। कुछ महिलाए अपने जीवन साथी के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष से नजदिकियाँ बनाती है। ये लोग पुरी तरह से मनोरोग के शिकार होते है। इन्हे अपने जीवन साथी को धोखा देकर अन्य विपरित लींग के इंसान से सम्बंध स्थापित करने मे बहुत खुशी होती है।

(5) कुछ पुरुष ऐसे होते है जो अपने करीबी महिलाओ को पुरुष के परिधान मे देखना पसंद करते है यह एक मनोरोग ही है। ऐसे पुरुष जो महिलाओ को पुरुषो के परिधान मे देखना पसंद करते है वह समलैंगिकता के शिकार होते है। इन्हे महिलाओ को भी पुरुष की तरह ही रहना पसंद होता है।

देखा आपने कैसे आसानी से हम मनोरोग को पहचान सकते है। जो इंसान अपनी स्थिति के विपरित चलते है वह मनोरोगी होते है। नारी की शान नारित्व मे ही है।पुरुष की शान पुरुष के रुतवे मे ही होती है। ऐसी स्थिति से जो हट कर चलना पसंद करते है वह केवल दया के लायक ही है,क्योकि यह एक तरह से मनोरोग की चपेट मे होते है।

ऐसे लोगो को मनोविशलेषक की सलाह परामर्श की जरुरत होती है। इनके परिवार व मित्र इन्हे प्यार से इनकी स्थिति के बारे मे इन्हे जानकारी दे तो शायद बेहतरीन हो।

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