शुद्ध सात्विक चाय ( हर्बल टी )

हम सात्विक भोजन इस लिए पसंद करते है क्योकि इस से तन-मन व बुद्धि शुद्ध बनती है। नये और स्वच्छ विचार मन मे आते है जो हमे जीवन-पथ पर निरंतर आगे बढने की प्रेरणा व ऊर्जा-शक्ति प्रदान करते है। खाओगे स्वच्छ अन्न तो बनेगा स्वच्छ मन। इस लिए हमे सदैव सात्विक भोजन करना चाहिए। तामसी व राजसी भोजन मन मे उंमांद लाते है, साथ आलसी बनाते है। तामसी व राजसी भोजन खाने से मन मे काम-वासना ( परलींगी पर आकृष्ण ),मोह ( किसी मन चाहे के कारण अपनी मान-मर्यादा भंग कर ),क्रोध ( किसी से घृणा व इर्षा वश हत्या करना या करवाना ),लोभ ( धन या मन चाही वस्तु के लिए अपराध बुद्धि )आदि कुबुद्धि उत्पन्न होती है

। इसी लिए सात्विक बुद्धि विवेक उत्पन्न करती है। इंसान अपने कर्तव्य-कर्म को अपनी जीमेदारी समझ कर सम्पन्न करता है। किसी से दवेष नही रखता। देखा आपने कि तामसी भोजन खाना कितना हानिकर होता है। चलिए सात्विक भोजन की यात्रा की नई कडी की तरफ बढते है। आज हम ऐसी चाय बनाने जा रहे है जो सात्विक है। इसको पीने से हमे स्वास्थ्य लाभ मिलने वाला है।आईए एक कदम बढाे हम अपनी सात्विक रसोई की तरफ।

सात्विक चाय बनाने के लिए आवश्यक सामग्री ————–

दो-तीन कप सात्विक चाय बनाने के लिए लगभग 5-6 कप पानी

सौंफ पाउडर ( पिस्सी सौंफ ) —– दो चुटकी ( चम्मच का चौथा हिस्सा )

धनिया पाउडर ( पिस्सा हुआ ) —– एक चम्मच

काली मिर्च पिस्सी हुई —— एक चुटकी पाँच-सात दाने

बडी ईलाइची पाउडर —— एक चुटकी ( पिंच ) या साबूत

मुलेठी पाउडर —— एक चुटकी

दाल चीनी —— एक चुटकी

सौंठ पाउडर एक चुटकी

तुलसी पत्ता —- एक

शहद या धागा मिश्री —–तीन-चार चम्मच ( टी स्पून )

सर्दियो मे बनाए जाने वाली चाय मे अतिरिक्त सामग्री ————

लौंग — एक नग

छोटी ईलाइची —-कुछ दाने ( पाँच सात ) या एक साबूत

अदरक —-छोटा टुकडा

तुलसी —–दो-तीन पत्ते

सात्विक चाय बनाने की विधी ———-

सात्विक चाय बनाने के लिए पहले बताई मात्रा के अनुसार एक बर्तन मे पानी लेंगे। उस बर्तन को आँच(गैंस ) पर रखेंगे। अब इसमे सभी मसाले जो ऊपर बताए गए है ऋृतु के अनुसार डाल देंगे शहद मिश्री को छोड कर बाकि मसाले। इस पानी मे सभी मसाले मिला देने के बाद पानी को आधा होने तक पकाना है। जब पानी उबलते-उबलते लगभग आधा रह जाए तो गैंस को बंद कर देना है। अगर आप इसमे मिश्री डाल रहे है तो गर्म मे ही डाल लेवे। अगर आप शहद मिलाने वाले है तो इस चाय को थोडा ठण्डा होने देवे। लगभग गुनगुनी चाय होने पर इसमे शहद मिला कर पी लेवे।

इस सात्विक चाय से होने वाले लाभ ———–

इस सात्विक चाय की पीने से पीत शांत रहती है। थाईराइड मे लाभदायक,शुगर नही होती, दिन भर ताजगी बनी रहती है। इससे गले की खराश,सर्दी लगना,खाँसी,बुखार,टोंसिल आदि सब ठीक होते है। इस चाय को पीने से हाई-ब्लड प्रेशर,मधुमेय ( शुगर ) नही होते आँतो को बल मिलता है। इसके कोई साईडइफेक्ट नही होते। इसको पीने से नशा नही होता जैसे चाय पत्ति व दुध से बनी आम चाय को पीने से नशा यानि उतेजना बढती है। स्वास्थ-वर्धक होती है। गोरप्रतिरोधक क्षमता बढती है इस सात्विक चाय पीने से। देखाना आपने कितने फायदे है इस सात्विक चाय मे तो क्यो ना आज से ही पहल की जाय दुसरी चाय जो चाय पत्ति से बनती है उसे विदा कर दिया जाए।

विषेष तथ्य ———

इस चाय को आप दिन मे केवल एक बार ही पीये। खाली पेट स्नान आदि से निवर्त हो ( नहा-धोकर ) कर इसका सेवन करे अधिक लाभ देगी। सर्दी पड रही हो तो शाम के वक्त भी आप इसका सेवन कर सकते है। वैसे इस चाय मे इतने गुण है कि दिन मे आपको बार-बार चाय पीने की आदत धिरे-धिरे छुट जाएगी। शरीर को बल तो मिलेगा ही इससे।

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