फूलो की महक चलिए फूलो की हसिन वादियो मे

फूल हो तो घर आंगन बगिया सब महक उठते है। हमारे कुछ फूल जो आम जन की पहुच तक है। कुछ खास फूल जिन्हे आप सबने बहुत बार देखा है। वादिया मेरा दामन रास्ते मेरी मंजील जाओैगे तुम कहाँ,फूलो सा चेहरा तेरा कलियो सी मुस्कान है रंग तेरा देख कर रुप तेरा देख कर कुदरत भी हैरान है। फूलो का तारो का सबका कहना है एक हजारो मे मेरी बहना है। फूल गुलाब का लाखो मे हजारो मे चेहरा जनाब का। ऐसे कितने ही गीत है जिन मे फूलो के नाम से कवि कल्पना करता नजर आता है। अरे भई किव फूलो को कल्पना मे ढाले बीना कैसे अपनी कविता की उडान भर सकता है जहाँ फूलो की महक व उसकी सुन्दरता का वर्णन ना हो वह कैसी कविता। चलिए आप सबको फूलो की महकती वादियो की सैंर करवाई जाए।

गैंदा फूल ————-

गैंदे का फूल दो-तीन प्रकार की वैराईटी मे मिलते है। गैंदा फूल पीला,संतरी रंग व लाल-पीला मिश्रित रंग मे मिलता है। गैंदा ऐसा फूल है जो जल्दी नही मिर्झाता। यानि गैंदे की बंदरवाल बना कर मेनगेट पर लगाई जाए तो कई दिनो तक घर मे आने जाने वालो को अपनी महक से सरावोर करती रहती है।

गुलाब फूल ————-

गुलाब फूल वाॅह भिनी-भिनी महक लिए वातावरण महका देता है। गुलाब के फूल कई रंगो मे मिलते है। लाल,गुलाबी,सिंदुरी,नीला,हरा,काला,सफेद,पीला इन सभी रंगो मे से लाल व गुलाबी,रंग के गुलाब आम मिल जाते है। गुलाब शर्बत बनाने, गुलकंद बनाने,गुलाब जल, गुलाब अर्क व कई मिठाईयो मे डालने के काम आता है। गुलाब का इत्र,सैंट भिनी खुशबु वाला होता है।

सदाबहार फूल ———— सदा बहार के फूल सदा आँक्सिजन से भरे रहते है यानि यह मनुष्य के सबसे बडे प्रेमी होते है। अजी शुभ चिंतक है तभी तो यह हमे भरपुर ताजगी भरी हवा प्रदान करते है। सदाबहार के फूल सफेद, गुलाबी व हल्के बैंगनी ( पर्पल ) रंग के होते है। इनके पौधे सदा फूलो से लदे रहते है। शायद इसी लिए इन्हे सदाबहार कहते है।

चमेली फूल ———–

चमेली के फूलो की महक आहाँ वहाँ भई क्या कहना। इसकी खुशबु मन को लुभा लेती है। चमेली सफेद रंग के फूल होते है। इसकी पँखुडी चिकनी मुलायम होती है। चमेली का इत्र,सैंट बहुत महकदार होता है। इसकी खुशबु लिए कई साबुन भी निर्मित होती है। अगरबत्तियो मे भी इसकी महक मिल सकती है। अगर घर के आंगन मे चमेली का पौधा लगा दिया जाए तो इसकी महक पुरे घर के वातावरण को पवित्र व सुवासित करती रहती है।

मोगरा फूल ————

मोगरा के फूल सफेद रंग के होते है। यह साईज मे छोटे होते है। इनकी महक भिनी भिनी होती है। लोग इसकी फूलमाला व वैंनी ( बालो मे लगाने वाला गजरा ) भी बनाते है। इसका इत्र,सैंट भिनी महक लिए होता है। इसकी महक की अंगरबत्तियाँ भी बनाई जाती है। घर को महका देने वाला फूल है मोगरा।

रातरानी फूल ———–

रातरानी के फूल सफेद व मदमस्त खुशबु से सरावोर होते है। यह फूल रात मे खिलते है इस लिए ही इन्हे रातरानी कहाँ जाता है। चांद की चटक चाँदनी मे खिले रातरानी के फूल ऐसे प्रतीत होते है मानो कोई दुग्ध ध्वल चादर औढे बैठा हो।

गुडहल फूल ———–

गुडहल का फूल रक्तवर्ण ( लाल रंग ) होता है। इसकी चार-पांच पंखुडिया होती है। इसकी पंखुडियाँ बडी होती है। इस फूल मे पंखुडियो के बीच एक कलगी होती है जिस पर छोटे-छोटे बुर आते है। यह फूल दिन मे खिलता है और शाम ढलने तक मुर्झा जाता है। इसके फूल माँ दुर्गा को विषेश प्रिय होते है। सूर्य देव की पूजा मे भी इन फूलो का प्रयोग किया जाता है।

गुडहल फूल

रजनीगंधा फूल ————

रजनीगंधा फूल सफेद चटक चांदनी जैसे होते है। इन फूलो मे खुशबु बेशुमार होती है। इसको कुछ लोग सुगंधराज भी कहते है।

रजनीगंधा फूल

कनेर फूल ———

कनेर प्राचीनकाल से ही धर्म व आस्था का हिस्सा रहाँ है। इस फूल को पूजा मे शामिल किया जाता रहाँ है हवन,यज्ञ मे इसका वि,्श उपयोग होता रहाँ है। कनेर लाल,गुलाबी व पीले रंग मे मिलते है। इसका पौधा थोडा बडा आकार मे होता है। यह जहाँ खिलते है पुरे वातावरण मे विषेश महक से वातावरण को भर देते है।

सूर्यमुखी फूल ————

सूर्यमुखी के फूल बडे होते है। इसकी पंखुडिया घणी होती है। यह सूरज के समान गोल व गोलाकार कोर लिए होता है इस लिए इसे सूर्यमुखी कहते है। यह पीले नारंगी व गहरे ललाई लिए होते है। इसके बीज से तेल निकाला जाता है।

कमल फूल ————

कमल का फूल पानी मे खिलता है। इसका रंग लाल,सफेद,गुलाबी होता है। देवी देवताओ को कमल फूल बहुत प्रिय होता है। लक्ष्मी पूजन मे यही फूल प्रयोग करते है। कमल के बीज बहुत ताकवर होते है इसी लिए इन के बीजो को खाने मे उपयोग लेते है। इसके बीजो को मखाना कहते है। इसके बीज व्रत मे भी उपयोग लाते है। मखाने से खीर व सब्जी बनाई जाती है। कमल की टहनी ( डंडी ) से सब्जी बनाई जाती है।

फूल कोई भी हो अपनी महक से वातावरण को महका देते है। फूलो के गुलदस्ते लोग घरो को सजाने मे लगाते है। बीना फूलो के कोई भी धार्मिक कार्य अधुरा रहता है। कोई मरीज हो उसको फूल देने की परम्परा इस लिए बनी कि वह फूलो की महक मे खो जाए और अपनी पीडा को कम कर सके। कोई भी कार्यक्रम हो उसमे फूल अपना महत्व रखते है।

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