पन्ना धाय रो बलिदान

जमाना बदळता देर कोनी ळागे। राजावा रो युग भी खत्म हो गयो अर नयो युग चालनो शुरु हो गयो। पर कोई जमानो इसो भी होवे है जिनरो मान युगा-युगा तक गायो जावे है। राजस्थान री घरती मांए इसा कई किश्सा होया है कि जिनरो गुनगान करता सारु म्हारी जवान नी थके है। पहळी लोगा मे देश राज्य खातीर बळिदान देवा खातर लोग कदेई ळार नई रेयाहा। इसो ही एक किस्सा म्हारी प्यारी घरती राजस्थान मे भी ङोयो हो जिनरो बखान आज भी लोगा री जुबान पर रेहवे है। आज आपने एक इसी घटना सांझी करवा ने चाहुँ हुँ। आप सब बडी ध्यान सु ई कहानी ने पढी जो इन सु आप ने प्रेरणा मिल सी। चलो इव देर ना करते हुवै कहानी रो बखान करा हाँ। कहानी है राजस्थान रे वीर वांकुरे राजा महाराणा प्रताप रे पिता उदयसिंह री धाय माँ रो मोटो बळिदान रो बखान इन कहानी मे मिल सके है।

पन्ना धाय रो परिचय ———–ृ

राजस्थान री घरती रो मान गढ चितौडगढ मे राणा रो राज हो। उन दिना राणा ने घना युद्ध करनो पडया हाँ दुश्मना सु आपनी घरती नै बचा खातर राणा आपना प्राण न्यौछावर कर दिया हाँ। राणा रे मरे पाछे ही उनरो कुवर ( बेटो ) उदयसिंह रो जन्म हुयो हो।राणा युध मे मारा गया हाँ। इन बात रो ळाभ उठावा खातर उन रो एक दुश्मन रणवीरसिंह राणा री रानी साईबा अर कुवर ने मार अपनो राज करन री योजना बनाई ही। इन खातर रणवीर रानी साईबा रो कत्ळ कर दियो हो। अब कुवर ने मारवा खातर बडी भयानक योजना तैयार करी ही।

योजना इन तरीया ही कि वह कुवर ने जद मारवा खातर जावै ळो उन घडी नगर रा लोगो ने तमाशो दिखावा खातर बुळा भेजवा ळो। ळोग तमाशो देखवा मे मग्न होवै ळा उन टाईम वा कुवर उदय रो खुन कर देवे ळो। अब रनवीर आपनो निष्कंटक राज करवा खातर कुवर उदय ने मारवा जावै ळो। इन बात री भंक महाराणा रे एक वफादार दरबारी ने ळाग गई। वा अब रनवीर रे खिळाफ जार कुवर उदय ने बचावा री योजना ( तरकीब ) सोचवा ळागयो।

इन तरीया वा कुवर ने बचा खातर कुवर रे महल माई गयो अर कुवर ने देख्यो। कुवर खांट माई आराम सु सो रीयो हो। अर उन री धाय माँ उन रे महल माई कुवर री निगरानी कर रेई ही। उन टाईम वा दरबारी कुवर उदय री धाय रो मन टटोलन री सोची। इन बास्ते वा कुवर री धाय पन्ना रे थोडी नेडी गयो अर पन्ना ने कहन ळाग्यो हो। देख पन्ना देरो बेटो अर कुवर दोन्या ने एक साथ तु पालन लागी है। एक यो कुवर बडो होर राजा बन जावै ळो अर तेरो बेटो दास ही बन पावै ळो। तो इन बास्ते अबी घनौ समो पडयो है आपरे बेटे ने राजा बनावा री सोच। किन्न तरीया तेरो बेटो राजा कुवर री जगीया बेठ सकेळो।

इतरो सुनता ही पन्ना धाय री आँख सु मोती ( आंशु ) झडना शुरु हो गईया हा। वा बोली कै म्हारे सु कोई गलती हो गई है कै सा। वा उन दरबारी रे पैरा मे पडर रोवा लागी। पन्ना कहवा लागी कि म्है कदै वी चंदन अर कुवर मे भेद नही समझयो हो। कुवर भी म्हारो दुध पियो है इन खातर कुवर भी मेरो बेटो ही है। अब वा दरबार समझ गयो हो कि पन्ना री स्वामी भक्ति पर शक नई करयो जा सके है। तो वा दरबारी पन्ना ने बोलयो सुन पन्ना मै थ्याने समझवा खातर आयो हुँ कि रणवीरसिंह रानी साईबा रो कत्ळ दियो है। अब वा कुवर उदय ने मारवा री योजना बनाई है।

रणवीर कुवर ने मार आप गद्दी पर बेठवा चाहवै है। दरबारी पन्ना ने समझायो देख पन्ना अब कुवर ने बचा री योजना बनानी पडेळी म्है थ्यानै ज्यू-ज्यू कहवु तु उन तरीया ही करती जा। पन्ना नाड हिलार हामी भरी। दरबारी पन्ना ने कहयो कि म्है फला रे टोकरे मे कुवर ने छुपार घाटी वाले रास्ते सु कुवर ने नगर सु बाहर भेजा ळा। नगर रे रास्ते मे तो तमाशे वाला आयोडा है। उन रास्ते सु कुवर ने भेजनो आसान कोनी। पन्ना ने समझा दरबार कुवर रे महल सु चलो गयो। अब पन्ना कुवर ने गोली लियो और जल्दी सु चंदन रा कपडा पहरा दिया।

फल वाला टोकरा ळेर आया पन्ना कुवर ने उन फळा वाले टोकरे मे छुपार घाटी वाले रास्ते सु नगर रे बाहर भेज दियो। थोडी देर बाद चंदन माँ-माँ पुकारतो कुवर रे महल मे पहुंचयो। पन्ना चंदन ने गले लगा प्यार करन लागी और रोवै है। चंदन ने कुवर रा कपडा पहरा आपने हाथ सु चंदन ने भोजन करावै है। चंदन कहयो माँ आज कुवर रा कपडा तु म्हाने क्यू पहराया है। पन्ना बोली काई नी पर रोवै तो चंदन आपरी माँ ने चुप करावे अर कहवै माँ तु रोवै है तो म्हारो काल्जियो घबराबे है माँ आपरा आँशु पुंछता हुआ चंदन ने गोदी मे ळेर ळोरी सुनावै है। वा जानती ही कि आज के बाद वा फैर कदै वी आपरे लाल ने इन तरीया ळोरी नई सुना सके ली।

चंदन ने ळोरी सुनार पन्ना चंदन ने कुवर रे पलंग मे सुला दियो हो। थोडी देर मा रणवीर नंशे मे घुत ळड-खतातो कुवर रे महल पुगयो। पुगता ही वा पन्ना ने देख्यो अर बोलयो कुवर कढे है। पन्ना आँख सु आँसु बाहर नी आवा दैवे है और हाथ के इशारा सु वा कुवर रे पलंग री तरफ हाथ करीयो। चंदन ने कुवर समझ रणवीर तुरंत आपनी तलवार सु चंदन रो धड गर्दन से अलग कर दियो। खुन टपकाती तळवार हाथ ळिया रणवीर खुशी सु झूमतो कुवर रे महल सु बाहर निकल गयो।

रणवीर रे जाया बाद पन्ना रोती – रोती चंदन ने गले लगायो र जल्दी ही वा चंदन ने जमीन मे दफनार घाटी वाले रास्ते नगर सु बाहर निकल गई। मन मे बेटे रो दुख ळिया और कुवर री चिन्ता सु पन्ना नगर रे बाहर पुग गई। कुवर ने ढुंढर दरबारी रे भेजयोडा मिन्खा सागे वा दरबारी काने पुग गई। दरबारी पन्ना और कुवर ने रहवा ने आपरे महल मा एक कमरो दियो और दोनुया रे भोजन खान पिन री व्यवस्था वा दरबारी आप रे ही घर सु कर दी। इन तरीया उन दरबारी रे घर रहता कुवर बडा हो गया हाँ।

एक दिन राजपूता ने खबर मिली कि कुवर उदय जिन्दा है तो वा सब मिलर कुवर ने राज गद्दी पर बैठा री योजना बनावा लागया। रणवीर ने इन योजना री खबर मिली तो वा घबरा गयो अर नगर छोड भाग गया। वै सब राजपूत मिलर कुवर उदय ने राजतिळक कर गद्दी पर बैठा दियो। कुवर अब राजा बन गया हाँ। कुवर गद्दी पर बैठता ही आपनी धाय माँ पन्ना रो हाथ पकड अपनी गद्दी पर बैठायो अर प्रजा ने कहयो आज म्है हा तो इन माँ पन्ना री बदौळत ही जिन्दा हाँ। इन खातर या धाय माँ म्हारी धाय नई माँ है। कुवर धाय माँ रो जयकारो ळगावै है।जय हो पन्ना माँ री। प्रजा भी कुवर रे सागे पन्ना रो सम्मान करे जयकारो लगावै है।

पन्ना ने इन तरीया कुवर उदय सम्मानित करईयो तो पन्ना री आँख सु खुशी रा आँशु छलक आया हाँ। पन्ना कुवर ने घणौ ही आशिर्वाद दैवे है और बोली आज म्है धन्य हुई कि कुवर म्हाने अपनी माँ रो दरजो म्हाने देर म्हारो मान बढायो है। भगवान कुवर री सारी खुशिया दैवे। फूल री चाह राखो तो कांटा रो सामनो करवा री हिम्मत भी रखनी पडे है। तो ही तो आपनी मंजिल री महक मिल सकै है। जय माँ पन्ना धाय का। कितरी बडी स्वामी भक्त या पन्ना ही।

जय श्री राम

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