गजल ( तुम आओ तो सरी ) काव्य मंजरी

हम दिल की बात करे पर तुम आओ तो सरी

हम हालात बया तो करे तुम आओ तो सरी

मुद्दतो से बंद, पडी है दिल की जमीन खोलेंगे हम सब राज पर तुम आओ तो सरी

सुनाएंगे सब हालात, बेकरार, सुनी पडी दिल की खिडकी को खोलेगे सभी पर तुम आओ तो सरी

अहदे एतराम करेगे पर तुम आओ तो सरी

हम दिलकी बात करेगे तुम आओ तो सरी

चंद रोज पहले, देखा था जो इक ख्वाब हमने हकिकत मे लाएंगे इक रोज पर तुम आओ तो सरी

लौटा लाएंगे वो घडी, जिसमे रहती थी सभी खुसियाँ मेरी पर तुम आओ तो सरी

हम दिल की बात करेगे पर तुम आओ तो सरी

निहारा करेंगे खुद से आईना अक्ष्य उतार लाएगे अपना पर तुम आओ तो सरी

महकती सी जीन्दगी मे बहार लौटा लाएगे पर तुम आओ तो सरी

तमन्नाओ की भरेगे हम उडान देखे जो कभी हसिन ख्वाब पुरा करने की आएगी घडी पर तुम आओ तो सरी

हम जज्बातो की करेगे कदर हर मुलाकात का होगा हसिन हशर पर तुम आओ तो सरी

हम दिल की बात करेगे पर तुम आओ तो सरी बदलेगे सब हालात पर तुम आओ तो सरी। तुम आओ तो सरी।—

7 thoughts on “गजल ( तुम आओ तो सरी ) काव्य मंजरी

    1. गजल मे सरी का मतलब कि नायिका अपने नायक को अपने दिल का सारा हाल समझाने के लिए बुलावा भेजती है कि तुम आओ तो हम अपने हर हाल को किस कदर व्यान करेगे ये नायिका का अपना अंदाज है।यहाँ सरी शब्द चमत्कार उत्पन्न करता है। अगर सरी की जगह सही लिखा जाता तो इसमे इतना उठाव नही आता। हम जब कोई काव्य रचना करते है तो कोई ऐसा चमत्कारी शब्द का प्रयोग करते है जिससे उस काव्य मे आकर्षण पैदा होता है, जो सुनने और पढने मे बेहतरीन लगता है। इसी उद्देश्य से सही की जगह सरी लिखा है।

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