कार्यक्षेत्र के अनुसार पूजनिय देवता

लोग अपने इष्टदेव की पूजा तो करते ही है मगर वह अपने कार्य (रोजगार ) के अनुसार किस देवता की पूजा करे कि उनको अपने कार्यक्षेत्र मे परेशानी ना आये या परेशानी आए भी तो उससे निकलने का मार्ग भी मिल सके इसके लिए आपको यह भी मालुम भी होना चाहिए कि किस क्षेत्र के अधिष्ठाता देवता कौन है। अगर हम अपने इष्ट के संग अपने कर्मक्षेत्र के देवताओ की भी पूजा अर्चना भी करे तो आने वाली हानि से निजात मिल सकती है। इसके लिए अधिक ना बोलते हुए अपनी मंजील की तरफ बढते है चलिए जानते है कि किस क्षेत्र पर आप काम करते है वहाँ के अधिष्ठाता देव है कौन जिनकी मदद आपको लाभान्वित कर सके।

वायु ( अंतरिक्ष,आकाश ) कार्यक्षेत्रानुसार देवपूजन ———-

जो लोग हवा मे कार्य करते है जैसे हवाईयान उडान के कार्य पायलेट, एयरहोस्टेस, वायु सेना, एयर ट्रेफिक कंट्रोलर, अंतरिक्ष मिशन पर वर्क करने वाले, अंतरिक्ष अनवेशन करने वाले, स्पेशलीडर ( एस्ट्रोनोट ),खगोलशास्त्री ( स्पेश रिसर्चर ) जितने भी आकाश और अंतरिक्ष से जुडे कार्य है उन सबके अनुसार जिन देवताओ की पूजा करनी चाहिए वह अंतरिक्ष के अधिष्ठाता देव श्री हरि विष्णु भगवान और पवन पुत्र हनुमान की पूजा करने से मदद मिलती है। जब विष्णु और हनुमान को संग ले चलना है तो इसके लिए विष्णु के रामवतार की पूजा अर्चना श्रैष्ठ है। ऐसे लोगो को अपने इष्ट के संग विष्णु की पूजा करे उनके किसी भी अवतार को माने पर खासतौर पर अगर राम की भक्ति की जाये तो श्रैष्टतम लाभ देखने के मिलेगा। जब अंतरिक्ष मे कोई मिशन छोडा जाये तब विष्णु व हनुमान का नाम ले कर छोडा जाये तो उसमे असफलता के अनुमान लगभग खत्म प्राय हो जाता है। इसके संग अग्निदेव व पवन देव की स्तुति भी कर लेनी वेहतर रहती है। जय श्री राम

पृथ्वी से सम्बंधित कार्य ————-

पृथ्वी यानि धरती पर रह कर किये जाने वाले कार्यो के लिए जिन देवताओ की पूजा करनी चाहिए वह है —- भूमी के देवता भूपती शिव है। धरती के कार्य जैसे पहाड काट कर रास्ता बनाना, भूगर्भ ( माइन्स ) सम्बंधित कार्य, यहाँ देवी के रुप मे माँ जगदम्बा की अर्चना करनी चाहिए। थल-सेना के सैनिको को माँ जगदम्बा ( दुर्गा ) व हनुमान जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए। खेती से जुडे लोगो को विष्णु ,ब्रहमा,महेश ( शिव ) तीनो की पूजा करने के संग गणपति को खेत मे विराजित करने से उपज अच्छी होती है और दुर्भाग्य दुर होता है। शिव धरती के मालिक भूपती है तो भूमी उपजाऊ रहती है। उरबरा सुचारु रुप से काम करती है। ब्रहमा की पूजा से फसल शुभता लिए पैदा होती है। अच्छी बरसात पाने के लिए इंद्र का आवाहन भी करना चाहिए फसल बोने के समय। व्यापारियो को जो धरती से सम्बंधित हो रेल-मार्ग से सामान मंगवाते बेचते है उन्हे शिव उनके रुप हनुमान की संग मे पूजा करनी चाहिए। कहते है शिव गद्दी ( रिजक ) के मालिक होते है। इसके लिए अपनी कमाई का एक अंश मात्र भी शिव के गल्ले ( कुलक ) मे डालते रहे तो रिजक कभी खाली नही होती मतलब उसको व्यापार मे घाटा नही होता। अपने गल्ले को कभी भी पुरा खाली नही छोडना चाहिए कुछ सिक्के ही रखे रहे पर खाली नही रहने देना चाहिए। अपनी गद्दी पर किसी दुसरे को नही बठने देना चाहिए क्योकि शिव गद्दी के मालिक होते है।

जल से सम्बंधित कार्य ————

जल से सम्बंधित कार्य करने वालो को गणेश, ब्रहमा, नारायण जिनके नाभी कमल मे ब्रहमा विराजमान है। इस तरह की मूर्तवाले देवताओ की पूजा करनी चाहिए। गणेश जल तत्व के देवता है और ब्रहमा खुद जल तत्व के अधिकारी है। नारायण का वास ही जल क्षीर सागर मे है। इस लिए जल से सम्बंधित कार्यो के लिए इन देवताओ की उपासना करनी चाहिए। जल मे कार्य करने वालो को वरुण के लिए एक अंश निकालना चाहिए। यानि जल मे कुछ प्रवाहित जरुर करना चाहिए एक मुठ्ठी अनाज भी अगर कभी कभार वरुण के नाम से डाल दिया जाए तो भी बहुत है। कहते है जल मे वरुण के गणवास करते है उनके भोजन की व्यवस्था हो जाये तो वह सहायक होते है। पहले हमारे पूर्वज जब भी यात्रा करते थे मार्ग मे नदी आदि जलाशय आने पर सिक्का ( रुपया ) नदी पानी मे डाल कर ही आगे की यात्रा करते थे इसे शुभता का प्रतिक माना जाता रहाँ है। नदी संमुद्र मे कार्य करने वाले गोताखोर, मछुआरे नेवी,संमुद्री व्यापारी आदि जीतने भी जल तत्व से जुडे विभाग है उन्हे नारायण नाभी कमल मे ब्रहमा व गणेश की पूजा अवश्य करनी चाहिए।जलदाय विभाग भी जल तत्व की पूजा करता रहे तो अशुभता दुर होती है।

पवन ( हवा ) से सम्बंधित कार्य ————

खिलाडियो को पवन देव की पूजा करने से बल मिलता है।खासकर धावक, क्रिकेटर बेडमिंटन आदि खेल से जुडे खिलाडी इस तरह पवन देव व पवन पुत्र की पूजा लाभदायक रहता है। वायु सम्बंधित कार्य मिशाइल आदि चलाना, हवाई जहाज, हैलीका्ॅप्टर, एयर लिफ्ट आदि से सम्बंधित कार्य करने वाले पवन-पुत्र व पवन देव विष्णु देव की पूजा करनी लाभ प्रद रहती है।

कोई विशेष कार्य करने जाए तब शुभता जरुर देखनी चाहिए।

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