महिलाओ की मासिक धर्म के तथ्य कितने सत्य

प्राचीन काल से ही भारतीय समाज मे मासिक धर्म के अनुसार बहुत से नियम बनाए गए है।आज की भागती-दौडती जीन्दगी और एकांकी परिवार होने के कारण पुरातन परिवेश को सहेज कर रख पाना आज हर महिला के लिए एक चुनौती साबित हो रहाँ है। इसके चलते बहुत सी महिलाए इन नियमो का उल्घन करने पर विवश हो गई और वह उन नियमो को नही मानती कुछ इसका विरोध तो करती है पर मानना जरुरी समझती है। इस तरह यह प्राचीन विचारधारा मे परिवर्तन हो रहे है। इसका एक कारण अनसम्झी है यानि महिलाए यह नही जानती की इसके दुषपरिणाम भी होते है। आईए जानते है कि यह नियम क्यो बनाए गए और क्या सभी नियम सही है।

मासिक धर्म के समय बहुत से कार्य है जिन्हे करने से महिलाओ को मना किया जाता है। इसके कुछ तथ्य सही भी है और समय के अनुसार इनको मान पाना मुश्किल भी है।

(1) मासिक धर्म आने पर खाने पिने की वस्तुओ को नही छुना चाहिए इस नियम के लिए आज महिलाओ मे बेमन्सय उतपन्न हो गए है कि क्यो वह कोई छुत की बिमारी है जो वह इन दिनो खाने पिने की वस्तुओ को हाथ नही लगा सकती।

मिथक की सच्चाई ———– मासिक धर्म के समय महिलाओ के शरीर से एक विशेष तरह की ओरा बन जाती है। इसके कारण बहुतइन दिनो बहुत सी वस्तुओ के खराब होने का भय रहता है। मिर्च मसाले,अचार आदि कई वस्तुए है जिन्हे छुने से या मात्र छाया पडने पर ही वह खराब होने लगते है। फंगस आने का खतरा रहता है। अगर रजस्वला स्त्री की छाया भी आचार पर पड जाए तो आचार नष्ट हो जाता है। आचार मे फंगस लग सकती है। इसके लिए रजोकाल मे आचार नमक मिर्च आदि को छुनी की मनाही इसी वजह से की जाती है।

अगर आपको मजबुरी है कि खाना आपने ही बनाना है तब इसके लिए रजोकाल आने से पहले ही तैयारी करके रख लेनी चाहिए। जैसे मसाले आदि थोडी मात्रा मे यानि बस केवल रजोकाल तक उपयोग मे आने जितनी मात्रा मे इन्हे एक अलग बर्तन मे निकाल कर रख लेना चाहिए या मसाले आचार बगैरहा निकालना भुल जाए तो सम्भव हो सके तो घर के किसी सदस्य से निकलवा लेवे। और घर के सारे मिर्च मसाले आचार आदि बंद करके अपनी ओरा यानि छाया से बचा कर रखना चाहिए। नही तो यह मसाले आचार आदि खराब हो जाएगे इन्हे खाने वाली की तबीयत भी खराब हो सकती है।

( 2 ) रजोकाल मे मासुम बच्चो यानि छोटे बच्चे हो उनसे दुर रहना चाहिए नही तो बच्चो की स्कीन मे दाने निकल सकते है। बच्चे बिमार हो सकते है। माँ बच्चो को उठा सकती है क्यि नवजात शिशु की माँ का रजोकाल नही आता।

( 3 ) आप किसी तीर्थ गई है वहाँ रजोदर्शन हो जाए तो तीर्थ स्थल मे स्नान करने नही जाना चाहिए। जैसे वहाँ की नदी,घाट आदि मे स्नान नही करना चाहिए क्योकि वह स्थल पवित्र और सार्जनिक होता है। वहाँ स्नान करने पर आपके शरीर की ओरा से निकलने वाली हानिकारक गैसे नदी घाट के पानी को दुषित कर देगी पानी अपवित्र हो जाएगा और इसके स्पर्म मे आने वाले बिमार हो सकते है स्कीन की समस्या उत्पन्न हो सकती है। आँतो व फैंफडो मे सूजन भी आ सकती है ऐसे पानी मे स्नान करने वालो के।

( 4 ) रजोकाल के वस्त्र तुरंत साफ कर के रखे नही तो इनकी दुर्गंध से परिवार वाले स्मपर्क मे आने पर बिमार हो सकते है। कोई शारीरिक व्यादि उतपन्न हो सकती है। बेहोशी अधिक नींद आने की समस्या उतपन्न हो सकती है। इसके लिए रजोकाल के वस्त्र मशीन मे ना डाले नही तो मशीन मे एक बार दुर्गंध बैठ गई तो वह हमेशा वस्त्र धोने पर भी दुर्गंध उत्पन्न करेगी। अपने रजो काल के वस्त्र अलग और हाथ से धोने चाहिए। इस तरह परिवार पर इसका बुरा प्रभाव नही पडेगा।

( 5 ) रजोकाल मे मंदिर ना जाए व पूजा पाठ ना करे इसका कारण कि ऐसा करने से घर मे नकारात्मकता बढने लगती है। घर अपवित्र ओरा मे लिप्ट जाता है। घर मे बने घर के मंदिर से भी दूर ही रहना ठीक रहता है।

( 6 ) रजोकाल मे पानी को हाथ नही लगाना चाहिए क्योकि इन दिनो रजकण कितना भी साफ करलो उसकी गंध हाथ मे बनी ही रहती है। इससे पानी दुषित हो जाता है। वैसे भी शरीर से एक विशेष गंध निकलती है जिसके स्मपर्क मे आने से पानी पर बुरा प्रभाव पडता है तो पानी से दूरी बना कर रखे घर के काम के लिए या पिने के लिए पानी परिवार के किसी सदस्य स् पानी अलग निकलवा कर रख लेना चाहिए वही पानी उपयोग मे लेना चाहिए।

( 7 ) इन दिनो घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए क्योकि शरीर से निकलने वाली विशेष गंध से आकृषित हो कर नेगेटिविटी या जर्मस हमारे संग घर मे प्रवेश कर सकते है। अगर निकलना मजबुरी हो तो किसी भी प्रकार का गंध वाला मेकअप ना करे सादगी से रहे। एकदम सवच्छ धुले वस्त्र उपयोग मे लाए तब बाहर जाए। किसी से स्मप्र मे ना आए हाथ मिलाना गले लगना आदि ना करे नही तो जाने अनजाने संक्रमण के निमंत्रण देगी। बहुत से पर जिव जो इन दिनो की गंध से आपके करीब आ सकते है और आप किसी बिमारी या महामारी की समस्या से घिर सकती है।

( 8 ) रजोकाल मे स्टोर करके रखने वाला सामान यानि अधिक समय तक उपयोग मे लाने वाला सामान खरीद कर ना लाए और घर मे ऐसा सामान पडा हो तो उन्हे छुए भी नही नही तो उन मे कीडे पडने की समभावना उत्पन्न हो सकती है।

( 9 ) रजोकाल मे आराम करना चाहिए इसका भी लाॅजिक है कि इन दिनो और दुस,रे दिनो की तुलना मे शरीर मे थकाबट रहती है। शरीर मे कमजोरी महसूस होती है। कई को को तो बहुत कषट-प्रद पिडा होती है। इसके चलते आराम करना जरुरी होता है। आराम करके पुरे महिने आप तंदुरुस्त रह सकती है। इन दिनो भारी काम तो भुल कर भी नही करना चाहिए। दो-चार दिन अगर आप काम ना करेंगी तो कोई नुकसान नही हो जाएगा। हा जब रजोकाल से मुक्ति मिल जाए करे ना अपना काम जितना कर सकती है।

( 10 ) रजोकाल मे ब्रहचर्य निभाये नही तो आपको कमर दर्द या डिस्क की समस्या हो सकती है। कोई बिमारी भी हो सकती है।

देखाना ना एक लापरवाही कितना नुकसान पहुचा सकती है। अपने शरीर की भाषा को समझे उसके अनुसार चले तो जितनी भी जीन्दगी मिली है वह खुशनुमा तरीके से जी सकते है। तो क्यो ना की जाए परवाह अपनी और अपनो की हम स्वस्थ तो परिवार को भी स्वस्थ रख सकते है उनकी सही से देखभाल करके इस लिए 2-3 दिन की छुट्टी आपको हर महिने लेनी चाहिए अपने लिए और दुसरे के हीत के लिए। बस इन दिनो वही काम करे जो बहुत जरुरी है। जिसके करे बिना आराम नही कर सकते बस वही काम करे और दिन भर आराम करे आराम का मतलब यह नही कि आपको पुरे दिन सोने को बोला जा रहाँ है। इसका मतलब कि आप शांति पूर्वक और जिस तरह शरीर को आराम मिले उस पोस्चर मे बैठे थोडा बहुत टहल सकती है। भागदौड ना करे। अपनी पसंद के काम जो आप घर पर आराम से बैठ कर कर सकती है वह करे। जो महिलाए नौकरी करती है वह आॅफिस से छुट्टी तो ले नही सकती मगर वहाँ जाकर आराम से बैठकर काम कर सकती है। बस बैकार के घुमने से बचना चाहिए। इन दिनो खाने पिने का पुरा ख्याल रखना चाहिए। इन दिनो हो सके तो फल व स्लाद अधिक खाए। चाए कम पिने चाहिए। दुध पिना चाहिए।

अधिक रजोस्त्राव ——- अधिक रजोस्त्राव होने पर आपको आराम बहुत करना चाहिए ऐसी स्थिति मे लेटना लाभदायक रहता है। बाहर घुमना फिरना नही चाहिए। गर्म मिर्च मसाले का सेवन कम कर देना चाहिए। ऐसी स्थिति होने पर रजो दर्शन के 2-3 दिन बाद इमली का शर्बत खट्टा मिठा इमली पानी बना कर पिना चाहिए इससे अत्यधिक रज स्त्राव रुकता है। ऐसा तब ही करे जब आपका रजोकाल बहुत दिनो तक चलता है तब ही इमली पानी पिना चाहिए अन्यथा जरुरत नही।

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