इसी तरह करोडो साल पहले मधु दुष्ट दानव-दैत्य धरती पर पैदा हुए और सारी दुनिया को परेशान करने लगे लोगो को सताने लगे मार-काट करके अपना आतंक फैलाने लगे इससे सारी दुनिया दुख से कराह उठी सब तरफ तराही-तराही मचने लगी लोग हताश, निराश, परेशान हो कर देवताओ से मदद मागने लगे देवता जब दुनिया की रक्षा करने लगे तो उन दुष्ट दैत्यो ने देवताओ को पराजीत करके स्वर्ग पर भी अपना कब्जा कर लिया इस लिए सभी देवता ब्रहमा जी से मदद पाने के लिए ब्रहम लोक गए और ब्रहमा जी से मदद मांगी तब ब्रहमा जी ने बताया कि इन दुष्ट दैत्यो ने घोर तपस्या करके अमरता का वरदान मागा था और मजबुरी मे उन्होने उन को वरदान दे दिया मगर उनसे दुनिया को खतरा हो सकता है।
यह जानते हुए ब्रहमा जी ने वरदान तो दिया मगर उस वरदान को नियमो मे बांधते हुए उन दुष्ट दैत्यो से कहाँ कि तुम्हारी मृत्यु यमराज नही करेगा मगर कोई दुसरा यह काम कर सकता है। प्रकृति का यही नियम है। यह बात जान कर उन दैत्यो ने ब्रहमा जी की बात समझते हुए कहाँ ठीक है अगर कोई मृत्यु देगा ही तो कोई नारी ही चुन लेते है जो हमे मृत्यु देने आए क्योकि वह अपने बल के मद मे इतने अंहकारी हो रहे थे कि उन्होने सोचा अगर कोई नारी मृत्यु देने आएगी तो वह उस नारी को ही मार डालेगे उनकी नजर मे नारी अबला होती है नारी मे इतनी ताकत नही कि वह किसी को मार सके। तब ब्रहमा जी ने कहाँ तथास्तु जैसा तुम चाहोगे वैसा ही होगा तुम्हारी मृत्यु नारी के हाथ मे ही होगी। ब्रहमा जी से यह वरदान पा कर बहुत खुश हुए कि उन्होने मृत्यु को ही जीत लिया अब सृष्टि मे उन को मारने वाला कोई नही होगा। यह सोच कर वे निश्चिन्त हो कर दुनिया मे अपना आतंक फैलाने लगे लोगो को सताने मे उनको आनन्द आता।
ब्रहमा जी कि यह बात सुन कर देवता भयभित हो गए कि अब उन दुष्ट दैत्यो को नष्ट नही कर सकते तब देवताओ को परेशान होते देख ब्रहमा जी ने कहाँ कि हम सब मिल कर श्री हरि विष्णु के पास चलते है वही हमे इसका कोई तोड बताएगे। यही सोच सभी देवता ब्रहमा जी के संग मिल कर श्री हरि विष्णु के पास गए। विष्णु भगवान ने उनकी बात को सुना फिर सोच कर कहाँ ठीक है मै तुम्हारी मदद करुगा। इसके लिए हमे पहले एक शक्तिशाली नारी पैदा करनी पडेगी जो उन दुष्ट दैत्यो को नष्ट कर सके।
भगवान विष्णु की यह बात सभी देवताओ ने मानली और सभी देवताओ ने मिल कर अपने शरीर के तेज को एकत्रित करना शुरु किया जैसे भगवान विष्णु ने अपने तेज से उस नारी की भुजा बनाई इसी तरह सभी देवताओ ने अपने- अपने तेज से उस नारी को निर्मित किया जब वह नारी बन गई तो उस नारी को सभी देवताओ ने अपने-अपने आयुध अस्त्र-शस्त्र प्रदान किये।इस तरह माँ दुर्गा की उत्पति हुई।
जब माता तैयार हो गई तब उन्होने सभी देवताओ को प्रणाम करते हुए पुछा कि मेरी उत्पति का कारण क्या है फिर सभी देवताओ ने माता दुर्गा को उनकी उत्पति का कारण समझाया कि दुष्ट दैत्यो जिनका स्वामी महिषासुर है उन्होने पुरी दुनियाँ मे आतंक फैला रखा है। उनके आतंक से धरती को मुक्त करवाने के लिए ही हम सभी देवताओ ने अपने तेजपुंज से आपका निर्माण किया है। अब भगवान विष्णु ने माता दुर्गा को कहाँ हे देवी भगवती तुम जाओ और उन दोनो दुष्टो का विनाश कर दो। यह सुन कर माता दुर्गा ने भगवान विष्णु के आगे मस्तष्क झुका कर युद्ध मे जाने की आज्ञा मांगी और आज्ञा पा कर माँ दुर्गा उन दैत्यो से युद्ध करने चली गई। उन दैत्यो का माता दुर्गा ने संहार किया और धरती को आतंक से मुक्त करवा दिया।
प्रेम से बोलो जय माता की जय माँ दुर्गा हे दुर्ग दानव मर्दिनी मां दुर्गा ने एक घोर आतंकी दैत्य दुर्ग का विनाश किया था तब से माता को एक नया नाम मिला दुर्गा। माँ दुर्गा शेर पर सवारी करती है। माँ के हाथो मे अस्त्र-शस्त्र,कमल,कमडलु, त्रिशुल, खेटक,तोमर,भिन्दीपाल,मूशल,परशु आदि आयुद्ध विराजते है। एक हाथ से माता दुर्गा अपने भक्तो को अभय प्रदान करती है इस लिए एक हाथ अभय मुद्रा मे रहता है। माँ लाल,गुलाबी वस्त्र धारण करती है। माता पुरे हार श्रृंगार करती है। माँ दुर्गा का रुप बहुत सुन्दर है वह देदिप्यमान पर्वत के समान जान पडती है।
माँ दुर्गा ने चंड-मुंड नामक दैत्यो का संहार किया तब से उनका नाम चामुंडा पडा। महिषासुर को मारने के कारण माँ दुर्गा का नाम महिषमर्दिनी पडा। रक्तबीज नामक दैत्य का संहार करने पर माँ दुर्गा का नाम रक्तबीजमर्दिनी पडा। जब घरती पर कई वर्षो तक बरसात नही हुई तो माँ ने अपने भक्तो का पोषण किया तब माँ दुर्गा का नाम साकमबरी पडा।